
उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप कांड में सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने सेंगर को दी गई उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उसकी जमानत मंजूर कर ली है.
अदालत ने अपने आदेश में सेंगर की सजा को सस्पेंड कर दिया है. उसे 15 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही राशि की तीन जमानतों पर रिहा करने का निर्देश दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने सख्त शर्त रखी है कि सेंगर पीड़ित के 5 किमी के दायरे में नहीं आ सकेगा. सजा पर यह रोक मामले में लंबित अपील के दौरान प्रभावी रहेगी.
क्या था पूरा मामला ….
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से जुड़ा बलात्कार मामला देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में गिना जाता है। इस मामले ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई, बल्कि पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। जांच के बाद CBI ने 11 जुलाई 2018 को पहला आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार के मुख्य आरोपी के रूप में नामजद किया गया।
इसके बाद 13 जुलाई 2018 को CBI ने दूसरा आरोपपत्र दाखिल किया। इस आरोपपत्र में कुलदीप सिंह सेंगर के साथ-साथ उनके भाई, तीन पुलिसकर्मियों और पाँच अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। आरोप था कि इन सभी ने मिलकर बलात्कार पीड़िता के पिता को झूठे मुकदमे में फंसाया और बाद में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

















